इक तेरे हाथ में मसीह, नजमुल है कुल हयात का

इक तेरे हाथ में मसीह, नजमुल है कुल हयात का



इक तेरे हाथ में मसीह, नजमुल है कुल हयात का
तुने बदल दिया मिजाज़, है सारे कायनात का ।।कोरस ।।

तुझसे जहां कि दिलकशी, शमसोकमर कि रोशनी (२)
तेरेही दमसे सिलसिला, कायम है दिन और रात का।।१।।

तू है सभींकी आब्रू, टूटे दिलोंकी आरजू (२)
भटके हुओंके वास्ते, रस्ता है तू निजात का ।। २।।

दुनियामें कोई शय नही, अपनी जगह जो हो अटल (२)
तेरी ही जातमें मिला हमको निशाँ सबात का ।। ३ ।।

खुशियाँ मना असीर तू, दरपे मसिह के आ गया (२)
तुझको ये ठोकरोंका गम, ना डर अब हादसात का ।।४।।

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