खूबसूरत है मसीह तू

खूबसूरत है मसीह तू
किस कलम रंग से लिखू
तेरे चेहरे पे है जो बात
होटों से कैसे कहूँ

दिल तो डूबे फिर से डूबे
तेरी मोहब्बत में, हो
तेरा चेहरा जो ना देखूं
फिर भला कैसे जीऊं

कर सके बयॉं ना फरीश्ते
तेरी मोहब्बत का, हो
मैं तो माटी हूँ दो पल की
मैं करूं तो कैसे करूं

कितने खुदगर्ज़ यहाँ लोग
नजर में प्यार नहीं, हो
मर ही जाऊं जो मैं तेरी
एक नजर से दूर रहूं

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